ऐ मूढ़ क्यों
बैठा तू चूप है।
फैली चारों ओर
ज्ञान की धूप है॥
शायद भूल गया तू अपनी शक्ति है।
पर मिली तुझे ज्ञान की भक्ति है॥
चल उठ खड़ा हो दिखा गगन को
चल दिखा तू अपनी वही पूरानी लगन को॥
कर सकता है तू
सबको अपने अधीन है।
क्योंकि तेरे
पूराने पंख फिर से हुए नवीन है॥
-आपका अपना
(अहसास)
http://authorehsaas.blogspot.com/

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