अरे भाई मुझे सत्ता मिल गई......
मिला एक दिन एक मूर्ख को सत्ता पर बैठने का अवसर।
पर न था उसमें अपने को अपने विवेक से चलाने का तेवर॥
जब कोई उसे कल्पना की पट्टी पढ़ाता था।
वो जल्दी से उसकी कल्पना की सीढ़ी चढ़ जाता था॥
न करता था वो अपने विवेक का प्रयोग।
तभी तो था उसकी कुंडली में मूर्खयोग॥
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