वाह रे कलयुग...........
समाज सुधारने चला था मैंं........
पर लोगों ने मुझे ही भटका दिया.........
भलाई करने चला था मैंं.........
पर लोगों ने मेरा घर ही विगाड़ दिया.........
मामू बनाने से मना करता था मैं.........
पर लोगों ने मेरा ही मामू बना दिया.......
वाह रे कलयुग तूने ये क्या किया.........
किसी को चरित्रहीन तो किसी को फरेबी बना दिया.......
-----Author Ehsaas

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