Wednesday, 6 November 2013


आज का आदर्श कलयुगी कुपुत्र
क्या आपको एहसास होता है या नहीं
आज इस कहानी को प्रस्तुत करते हुए मेरे हाथ काँप रहे है। मैंने अपनी आंखो के सामने एक कलयुगी पुत्र को अपने पिता को अपमानित करते हुए देखा। अक्सर मैं समाचारों मैं सुनता था कि पुत्र ने पैसों के लिए अपने पिता का गला घोंटा या कलयुगी पुत्र ने अपनी प्रेमिका का दिल जीतने के लिए अपने पिता के गर्दन काटी।
क्या इस कलयुगी पुत्र को कभी एहसास होता होगा कि पिता क्या होता है। अपने स्वार्य व अभिमान के साथ जीने वाले इस कलयुगी कुपुत्र ने कभी पिता का सम्मान नहीं किया होगा।
मैंने एक हरद्य विदारक घटना अपने आंखो के सामने देखी। एक पिता जिसने  अपना पूर्ण जीवन अपने परिवार को दिया। एक दिन उस पिता को उसका 26 वर्ष का स्वार्थी और अभिमानी कुपुत्र किसी बात को ज़ोर देकर और अपने पिता पर दोषारोपण करते हुए कह रहा था।
तभी अचानक उसके पिता के मुख से अपने पुत्र के लिए "चुप हो जा मुझे क्यों समझा रहा है" निकाल पड़ा , इतना सुनते ही उस कुपुत्र के अहंकार को चोट लग गयी और उसने अपने भोले पिता को गाली देना शुरू कर दिया।
उस कुपुत्र ने यहाँ तक कहा कि " साले बुढ़्ढ़े चुप हो जा, तुझ बुढ़्ढ़े को एक हाथ पड़ेगा तो तू वहाँ नाली पर गिरेगा "।
यह सुनते ही उस कलयुगी कुपुत्र का पिता रोने लगा । इस घटना को देखकर मेरी आंखो में आँसू आ गए।
इस कलयुगी कुपुत्र को अपने पिता से इन शब्दों को कहने का अधिकार किसने दिया। जिस पिता ने अपना सम्पूर्ण जीवन अपने परिवार को दिया, जो पिता आज भी अपने 26 साल के पुत्र के कहने पर उसे दही जलेबी खिलाने को तैयार रहता है।
क्या इस कलयुगी कुपुत्र का अपने दही जलेबी खिलाने वाले पिता से इस तरह के शब्दों का प्रयोग करना उचित हैं।
मैं इस एहसास ब्लॉग को पड़ने वाले सभी भद्रजनों से इस तरह के कलयुगी कुपुत्रो की कहानी, जो हमारे आस पास पड़ोस में रहते है, को यहाँ शेयर करके पूरी दुनियाँ को बताने के लिए विनती करता हूँ।
आपका एहसास

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