समाज सुधारक ठग
विद्या
क्या आपको एहसास होता है या नहीं
आज मैं "समाज सुधारक ठग विद्या" शीर्षक पर अपने
विचार प्रस्तुत कर रहा हूँ।
क्या किसी ठग विद्या से किसी समाज या व्यक्ति को सुधारा जा
सकता है?
अक्सर मैं अपने चारों ओर देखता हूँ कि अगर किसी का पुत्र मंदिरापान
करता है तो उसके माता पिता कहते हैं कि इसकी शादी कर दो, यह मंदिरापान करना छोड़ देगा। अगर किसी का
पुत्र बुरी कुसंगतियों में फंसा है तो उसके माता पिता कहते है कि इसकी शादी कर
देंगे तो यह अपनी जिम्मेदारियो को समझेगा परंतु क्या यह वाकई में होता है। चलो एक
कहानी प्रस्तुत करता हूँ।
हमारा ढोंगी बाबा जिसके बारे में हम अपनी पुरानी कहानियो
में बता चुके है। बाबा कि आदत शुरू से ही अपने माता और भाई बहिनो को भद्दी गालियां
देने की थी। वह किसी बाबा की संगत में आकार ज्योतिस का ज्ञान लेकर ज्ञानी
(ज्योतिषी) बन गया।
वह सुबह 2 घंटे और शाम को
भी 2 घंटे पूजा करता है, रोज मंदिर में घंटो बैठा रहता है जिस कारण
उसकी माता का ठग विद्या का प्रयोग करने की सूझी।
उसने अपने पुत्र का विवाह करके उसे सुधारने की सोची। उसका
विवाह हुआ परंतु वह ढोंगी बाबा नहीं सुधरा। आखिर इसका खामियाजा उस नारी को भुगतना
पड़ रहा है जिसे ठगकर उसकी माँ ने अपने पुत्र की शादी उस से की।
तो आखिर इस समाज सुधारक ठग विद्या का प्रयोग करके समाज
सुधारता है या आखिर में किसी न किसी नारी को ही भुगतना पड़ता है।
कृपया आप के घर में या आस पास पड़ोस में इस तरह की समाज
सुधारक ठग विद्या का प्रयोग किया जा रहा है तो शेयर करके पूरी दुनियाँ को बतायें।
आपका एहसास
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