जूल्मी इंटरनेट
क्या आपको एहसास होता है या नहीं
आज हम जहाँ हाइटेक दुनियाँ में कदम रख चुके है। इंटरनेट के
आने से हमारे तरह-तरह के काम चंद मिनटो में हो जाते है।
वहीं इसके कुछ
दूष्प्रभाव भी है। पता नहीं क्यों हमारा समाज किसी चीज़ की अच्छी चीज़ों को ग्रहण करने
के बजाए उसके दूसरे बूरे पहलू को तलाशने लगता है।
आज मैं इसी इंटरनेट के दूष्प्रभाव से प्रभावित एक महिला की
कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ।
बहुराष्टीय कंपनी में एक महिला कार्य करती थी। एक दिन किसी
बात को लेकर उसकी अपने साथी कार्यकर्ता से झड़प हो गयी। मामला शांत हो गया परन्तु
उस साथी कर्मचारी ने इस बात को अपने दिल में रखा और उस महिला से बदला लेने को अपने
को प्रतिबद्द किया|
उस साथी कर्मचारी ने इंटरनेट का सहारा लेकर उस महिला का
नकली ईमेल आई डी बनाया और उस ईमेल आई डी से रोज आफिस के सारे लोगो को गुड मॉर्निंग
लिखकर भेजने लगा। आफिस के अन्य लोग उस नकली ईमेल को असली समझकर अपना जबाब भेजने
लगे। धीरे- धीरे उस साथी कर्मचारी ने लोगो को शायरी भेजना शुरु किया। जब उसे सभी
से जबाब मिलने लगे तो उसने उस महिला की फोटो प्राप्तकर उसको अश्लील बनाकर सबको भेज
दिया और फोटो के साथ एक मैसेज भेजा कि "कृपया मुझे मजेदार बातों के लिए रात
को रोज कॉल करे।
अचानक उस महिला
के नंबर पर phone कॉल आना शुरु हो गया पर उसने इस बात पर ज्यादा ध्यान
नहीं दिया। एक दिन वह रास्ते पर जा रही थी तभी उसके आफिस के अन्य कर्मचारी ने उससे
भद्दी गंदी बातें बोली। उसने उस घटना पर भी ज्यादा गौर नहीं किया। अगले दिन फिर
दूसरे कर्मचारी ने उससे बतमीजी की आखिर वो समझ नहीं पा रही थी कि उसके साथ ऐसा
क्यो हो रहा है।
उसने अपने बॉस से इस बात की शिकायत की तो बॉस भी उसी पर
चिल्ला पड़ा और उस महिला को ही नौकरी से निकाल दिया।
जब वो पुलिस के पास गयी तो हमारी आधुनिक दरयादिल पुलिस ने
भी उसको झूठा बताकर निकाल दिया।
जब उसने पुलिस पर उन लोगो के खिलाफ कार्यवाही करने के लिए
ज़ोर दिया तो पुलिस ने उल्टा उस महिला पर झूठा केस डालने को तैयार हो गयी। आखिरकार
उसने अपनी लड़ाई लड़ी और दोषियो को सजा हुई।
लेकिन सिर्फ इन दोषियो को सजा मिलने से, उस महिला की जो
बेइज्ज़ती हुई या सामाजिक बहिष्कार हुआ, की पूर्ति नहीं की जा सकती।
पता नहीं कब लोगो को एहसास होगा इस पुरुषप्रधान पढे लिखे
समाज में नारी को भी जीने का हक है। जो पुरुष नारी को देवी दुर्गा, काली के रूप में
पूजता है आखिर वो ही लोग क्यो उसे नीचता की घिनौनी दृष्टि से देखते है।
आखिर ये कब तक चलेगा। कब हमारा समाज जागेगा। कब तक सब वराबर
होंगे। कब हम सब एक दूसरे को समानता की दृष्टि से देखेगे।
आपका एहसास
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