पत्नी का दर्द
क्या आपको एहसास होता है या नहीं
आज मैं आपको एक भरे पूरे परिवार की
कहानी प्रस्तुत कर रहा हूँ|
इस कहानी का नायक हमारी पुरानी कहानी का ढोंगी बाबा ही है|
ढोंगी बाबा का परिवार है - उसकी पत्नी,एक भाई और उसकी पत्नी, एक बहिन और उसकी माँ| पिता का देहांत हुए दस साल हो गए है|
बाबा विचित्र हरकतों का स्वामी है जैसा की हमने पुरानी
कहानी में बताया था| वह 2 घंटे सुबह,
2 घंटे
शाम को भगवान का भजन करता है| वह रोज मंदिर
जाता है और वह अपनी पत्नी क साथ अमानवीय व्यवहार करता है|
एक दिन की घटना है कि वह पूजा करने गया तो अचानक ही वह
भद्दी गालियाँ अपनी पत्नी को देने लगा| पत्नी ने कारण
पूछा तो उसने नहीं बताया| शाम को आफिस से
घर आया और फिर भद्दी गालियाँ देने लगा फिर थोड़ी देर बाद गालियाँ देते हुए अपनी
पत्नी से बोला - यहाँ मंदिर में यह प्लेट तूने क्यों रखी| पत्नी ने कहा मैंने नहीं रखी| गल्ती से देवरानी पूजा करने के बाद यहाँ भूल
गयी| यह जानने के बाद भी ढोंगी बाबा पूजा
करते-करते अपनी पत्नी को भद्दी गालियाँ दे रहा था|
उसने शाम को
आफिस से घर लौटकर भी अपनी पत्नी को ही गालियाँ दी| बाद में अगले दिन पत्नी से बोला कि मुझे पता था वह
प्लेट तेरी देवरानी ने रखी है| पर
में उसको सीख देने के लिए तुझे गाली दे रहा था - मैं तेरी कंधे पर बंदूक रखकर तेरी
देवरानी पर गोलियां चला रहा था| पत्नी
ये सुनकर स्तब्ध थी और सोच रही थी कि किसी और कि गल्ती कि सजा उसे क्यों भुग़तनी
पड़ी| वाह रे पति तुझ
में इतनी भी हिम्मत नहीं है कि किसी से सीधे बात कर सके, उसके लिए भी तुझे पत्नी के कंधे कि जरूरत पड़ती है|
ढोंगी बाबा अपनी पत्नी से सीधे मुंह बात नहीं कभी बात नहीं
करता है वह हमेशा उसको और उसके गरीब माता पिता को गाली देता रहता है|
एक दिन उसका अपनी माँ से झगड़ा हो गया
और अचानक ही उसके मुंह से निकल पड़ा कि मैं अपनी पत्नी को अपने जूते कि नोक पर रखता
हूँ| यह सुनकर पत्नी को गहरा आघात पहुंचा कि जिस व्यक्ति को वो अपना भगवान समझती है
वो उसे अपने पैर की जूती समझता है|
आज जहां हम स्त्रियों के अधिकारों की बात कर रहे है जहां
उन्हें हर जगह आरक्षण देने के बात कर रहे है तो वहाँ इस महापुरुष ढोंगी बाबा समाज
में अपने को सर्वश्रेष्ठ पुरुष होने का ढोंग करते है|
क्या इस ढोंगी बाबा को पता नहीं कि जिस दुर्गा की वो पूजा
करता है वो स्त्री है|
क्या इस ढोंगी बाबा को पता नहीं कि जिस काली कि वो उपासना
करता है वो स्त्री है|
जो पुरुष 2 घंटे सुबह और 2 घंटे शाम को दुर्गा व काली कि उपासना करता
है आखिर वो स्त्री को अपने पैर की जूती कैसे समझ सकता है?
हमारे पढे लिखे समाज में ऐसे बहुत से महापुरुष है जो आपके
घर में या आस पास पड़ोस में रहते है कृपया उनके बारे में यहाँ शेयर करके पूरी
दुनियाँ को उनसे अवगत कराएं|
आपका एहसास
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