Tuesday, 3 February 2015

कबूतर की घर बापसी?




कबूतर की घर बापसी
एक बार एक कबूतर धूप में छिलकारी मारता हुआ अपने घर को जा रहा था। तभी अचानक उसकी नजर उसकी ओर तेजी से आती हुई बिल्ली पर पड़ी।
कबूतर हमेशा की तरह खतरा जानकर भी अपनी आदत से मजबूर था और उसने सोचा कि अगर मैं आंखे बन्द कर लूंगा तो मेरी जान बच जाएगी, पर उसने यह नही सोचा कि उसकी आंखे बन्द करने से क्या होगा- माना उसे बिल्ली दिखाई नही देगी पर उसकी ओर बढ़ रही मुसीबत थोड़े न कम हो जाएगी।
आखिर हुआ वही जिसका डर था- बिल्ली ने उस मासूम कबूतर को खा लिया जो यह सोच रहा था कि उसकी आंखे बन्द करने से या अनजान बने रहने से मुसीबत टल जाएगी।
अगर कबूतर ने समय रहते अपनी आंखे खोल ली होती तो वह घर वापसी करते हुए बच जाता। लेकिन उसने सोचा कि वह अपनी आंखे बन्द करके उस शातिर बिल्ली को धोखा दे देगा।
इस कहानी से यही शिक्षा मिलती है कि कबूतर ने समय रहते परिस्थितियों से समझौता करते हुए अपनी आंखे खोल ली होती तो उसकी राह आसान हो जाती।


(आपका अपना अहसास)

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