मै कुम्हार हूँ पर दीवाली-
के दिन
मै लाचार हूँ॥
लोग चायनीज ड्रैगन की तरफ दौड़ रहे है-
तभी तो मेरे मिट्टी के दिए अस्तित्व खो रहे
है॥
पर मै अपनी संस्कृति निभा रहा हूंँ-
बस
दीपावली के लिए दिए बना रहा हूँ॥
शायद मेरे घर में भी उजाला हो,मेरे मिट्टी
का
दिया ड्रैगन से ज्यादा निराला हो॥
मेरे घर का चूल्हा बुझा है क्योंकि
आपका
घर ड्रैगन से सजा है॥
करना फैसला सबको है-
थोड़ी
खुशी देना हमको है॥
-आपका अपना
अहसास
http://authorehsaas.blogspot.com/

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