वर्तमान शिक्षक दिवस
जैसा कि हम जानते है India में Teacher’s Day को Teachers’ Appreciation Day के रुप में भी जाना जाता है।डॉ. सर्वपल्लवी राधाकृष्णन जी ने शिक्षकों को उचित सम्मान दिलाने के अपने जन्म दिवस को शिक्षक दिवस के रुप में मनाना स्वीकार किया था।
वर्तमान में शिक्षक दिवस ने कोई और रुप ले लिया है- जहां केवल कुछ छात्रों द्वारा अपने विद्यालय के कुछ favorite अध्यापकों को कीमती महंगे उपहार दिए जाते है। वहीं कुछ अध्यापक उपेक्षा का शिकार होते है जिनका शायद छात्रों के साथ पढ़ाई के अलावा कोई और वार्तालाप नहीं होता है।
उपेक्षा के शिकार अध्यापकों के लिए तो Teachers’ Appreciation Day की जगह Teachers’ Depression Day हो जाता है।
साथ ही उन छात्रों के लिए भी Depression Day हो जाता है जो गरीवी के कारण अपने favorite अध्यापक को उपहार नहीं दे पाते।
वैसे भी अध्यापक का छात्रों के हाथों महंगे उपहार लेना कहां तक उचित है?
जब छात्र का उसकी Study , creativity के लिए संसार में नाम होता है तव स्वतः ही शिक्षक को उसका उपहार मिल जाता है।
संस्कारों के नाम पर कुछ विद्यालयों में जहां छात्र केवल Teacher Day और अपने Birthday के दिन पैर छुकर प्रणाम करते है या नमस्कार करते है। तो ऐसे छात्रों से शिक्षक को क्या सम्मान मिलेगा?
डॉ. सर्वपल्लवी राधाकृष्णन जी का मानना था कि शिक्षा की ज्योती से ही हमारे समाज में फैली बुराइयों का अन्त किया जा सकता है।
“Teacher should be best minds in the country”
अतः हम सब शिक्षकों को शिक्षा के माध्यम से समाज में फैली सभी कुरीतियों का अन्त करने का सदा प्रयत्न करना चाहिये।
-अहसास

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