पहचान सको तो
पहचान लो,
दुनिया बड़ी
जालिम है ये मान लो।
झूठे का
होता बोलबाला समझ लो,
सच्चा सदा
भटकता ये जान लो।
धोखेबाज की हो रही पूंछ है,
उसके काम के लिए बैंको में भी
लग लम्बी गूंज है।
फिर भी बना रहा
उल्लू है,
उसके पास
बाबाजी का ठल्लू है।
उस शातिर
ने किया सबको बदनाम है,
फिर भी सभी
की जुबां उसका नाम है।
लोग उसको
अच्छे से समझते है,
पर उसके भोले
चहरे पर मरते है।
चापलूसी,
चालकी उसका एक फन है,
खुदगर्जी में
मिलता उसके नम्बर वन है।
पहचान सको तो
पहचान लो,
दुनिया बड़ी
जालिम है ये मान लो।
(आपका अपना अहसास)

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